आज माताओं द्वारा संतान के दीर्याघु के लिए रखी हलषष्ठी व्रत


विशेष प्रकार के सामाग्री से होता है पूजन एवं परायण
सगरी बनाकर कमरछठ महरानी का करते हैं पूजन
यह छत्तीसगढ़ की प्रमुख व्रत है।


(सुरेश पटेल)
बलौदाबाजार टाईम्स न्यूज।।। 
सरसीवा - आज बुधवार को माताएं संतान के दीर्याघु के लिए हलषष्ठी व्रत सम्पन्न हुवा यह छत्तीसगढ़ की प्रमुख व्रत है जिसमें विशेष प्रकार के सामाग्री पूजा एवं परायण होता है । सगरी बनाकर कमरछठ महरानी का पूजन का करते हैं ।
हलषष्ठी व्रत जिसे कमरछठ व्रत भी कहा जाता है यह छत्तीसगढ़ की प्रमुख व्रत है जिसमें माताएं संतान की लंबी आयु के लिए उपवास रख एवं नियत स्थान पर सगरी बनाकर पूजन करते हैं एवं पसहर चावल का खिचड़ी खाकर व्रत का परायण करते हैं । हलषष्ठी व्रत जो कि संतान की लंबी आयु के लिए माताओं द्वारा रखी जाती है । यह व्रत छत्तीसगढ़ की प्रमुख व्रत है जिसमे संतान के लंबी आयु के लिए किया जाता है । इस वर्ष यह व्रत आज बुधवार हुवा  । जिसमें माताएं यह व्रत रखकर एवँ नियत स्थानों में एकत्रित होकर मिट्टी का सगरी गौ माता बलराम एवं नाव नाविक बनाकर विशेष प्रकार के सामान से पूजा अर्चना आरती करते हुए कथा का श्रवण करते हैं ।

इस पर्व में विशेष प्रकार के पूजन सामाग्री लाई, महुआ के फल, दोना-पत्तल, दातौन , पसहर चांवल ,छः प्रकार के भाजी ,काशी फूल ,कमल फूल,भैसी की दूध, दही, घी, नारियल, छुही का उपयोग कर पूजन करते हैं । व्रत धारी महिलाएं निश्चित स्थान पर एकत्रित होकर सामूहिक पूजन कर हलषष्ठी महारानी का कथा सुन तत्पश्चात आरती एवँ प्रसाद वितरण के बाद व्रत धारी माताओं द्वारा अपने बच्चों को सिंदूर का तिलक लगाकर छुही से पोता मारते हुए लंबी उम्र का आशीर्वाद देते हैं । रात्रि में विशेष प्रकार के पसहर चावल से बने खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का परायण की । माताएं यह व्रत संतान प्राप्ति और बच्चों की लंबी आयु के लिए करते है। भाद्रपद की छठवी तिथि को मनाए जाने वाले पर्व में छह प्रकार की भाजी, छह प्रकार के खिलौने, छह प्रकार के अन्न वाला प्रसाद एवं छह कथा सुनी जाती है। इसके अलावा पूजन में पसहर चावल, छह प्रकार की भाजी की सब्जी जिसमें मुनगा, कद्दू, सेमी, तोरई, करेला, मिर्ची, भैंस का दूध, दही, घी, सेंधा नमक, महुआ पेड़ के पत्ते का दोना उपयोग किया जाता है और बच्चों को प्रसाद के रूप में धान की लाई, भुना हुआ महुआ, चना, गेहूं, अरहर, छह प्रकार का अनाज मिलाकर बांटते है।

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