बलौदाबाजार टाईम्स न्यूज़-- रायपुर।। छात्र लिलेश कुमार साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ का फार्मा सेक्टर एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है,राज्य में 100 से अधिक निजी फार्मेसी कॉलेज खुल चुके हैं,लेकिन विडंबना देखिए कि इनमें से एक भी स्वतंत्र शासकीय फार्मेसी कॉलेज नहीं है,शिक्षा का बाजारीकरण इस कदर बढ़ गया है कि गुणवत्ता कहीं पीछे छूट गई है और छात्रों का राज्य फार्मेसी काउंसिल द्वारा समय पर पंजीयन नहीं कर पाना छात्रों परेशानियों का सामना करना शिक्षा के गिरते स्तर पर गंभीर सवाल हैं निजी कॉलेजों में 'नॉन-अटेंडिंग' प्रवेश का चलन शिक्षा की नींव खोखली कर रहा है,मोटी रकम लेकर बिना कॉलेज गए पास होने की व्यवस्था ने योग्य छात्रों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। साहू ने बताया कि हाल ही में एआई (AI) और तकनीकी माध्यमों से सामूहिक नकल की खबरें इस कड़वे सच को उजागर करती हैं कि स्किल्ड फार्मासिस्ट नहीं,बल्कि सिर्फ डिग्रीधारी भीड़ पैदा कर रहे हैं,पंजीकृत फार्मासिस्ट: वर्तमान में प्रदेश में लगभग 40,000 पंजीकृत फार्मासिस्ट हैं,हर साल नई डिग्रियां: 100+ कॉलेजों से हर साल 7,000 नए फार्मासिस्ट निकल रहे हैं,भयावह भविष्य: अगले 5 सालों में यह संख्या 80,000 से 1 लाख तक पहुँच जाएगी। लिलेश साहू ने बताया कि रोजगार का अभाव: कहाँ जाएंगे ये युवा एक तरफ फार्मासिस्टों की फौज तैयार हो रही है,दूसरी तरफ सरकारी सिस्टम में उनके लिए दरवाजे बंद नजर आते हैं,6,000 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में केवल 1100 पद ही स्वीकृत हैं,CGMSC, शासकीय औषधि प्रयोगशाला (FDA) जैसे महत्वपूर्ण विभागों में वर्षों से पद रिक्त पड़े हैं,वेटनरी अस्पतालों और प्रदेश के ब्लड बैंकों (शासकीय एवं निजी) में फार्मासिस्टों की अनिवार्य नियुक्ति न होना स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है,साहू ने कहा कि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश का फार्मासिस्ट केवल बेरोजगारी का शिकार होकर रह जाएगा,गुणवत्ता पर नियंत्रण: निजी कॉलेजों में 'नॉन-अटेंडिंग' और नकल माफिया पर सख्त लगाम लगे,सरकारी कॉलेजों की स्थापना: राज्य में स्वतंत्र शासकीय फार्मेसी कॉलेज खोले जाएं,रिक्त पदों पर भर्ती: स्वास्थ्य केंद्रों, वेटनरी अस्पतालों और ब्लड बैंकों में फार्मासिस्टों के रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए,फार्मासिस्ट केवल दवा बेचने वाला नहीं,स्वास्थ्य तंत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
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