गोपालपुर प्राथमिक स्वास्थय केंद्र में प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप! डॉक्टर बोले – ऑक्सीजन के साथ भेजते तो बच सकती थी जान! हॉस्पिटल मे रेफर के लिए ऑक्सीजन का व्यवस्था न होना मॅनॅग्मेंट की भारी लापरवाही!



गोपालपुर प्राथमिक स्वास्थय केंद्र में प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप!

डॉक्टर बोले – ऑक्सीजन के साथ भेजते तो बच सकती थी जान! 

हॉस्पिटल मे रेफर के लिए ऑक्सीजन का व्यवस्था न होना मॅनॅग्मेंट की भारी लापरवाही!

सरसींवा (सारंगढ़–बिलाईगढ़) : जिले के गोपालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है जिसमें जन्म के कुछ ही समय बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद पीड़ित पिता ने कलेक्टर से लिखित शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भटगांव निवासी राकेश कुमार राजेंत्री अपनी पत्नी श्रीमती सोनिया राजेंत्री को प्रसव पीड़ा होने पर गोपालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स द्वारा जांच के दौरान बताया गया कि गर्भ में बच्चे की धड़कन धीमी है और मेकोनियम (गंदा पानी) आ चुका है, जो जोखिम की स्थिति मानी जाती है। परिजनों के अनुसार, उन्होंने महिला को तुरंत किसी बड़े अस्पताल ले जाने की बात कही, लेकिन स्टाफ द्वारा 10–15 मिनट प्रतीक्षा करने की सलाह दी गई। पीड़ित का आरोप है कि अस्पताल में महिला को इंजेक्शन लगाने के साथ बार-बार पेट दबाया गया। कुछ समय बाद प्रसव तो हो गया, लेकिन नवजात शिशु ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था। इसके बाद परिजनों को बच्चे को तुरंत बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। एम्बुलेंस और ऑक्सीजन की सुविधा नहीं मिलने के वजह से परिजन निजी वाहन से बच्चे को जांजगीर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने कुछ ही देर में नवजात को मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि यदि बच्चे को समय पर ऑक्सीजन लगाकर रेफर किया गया होता, तो उसकी जान बचने की संभावना थी। इस पर पीड़ित पिता ने सवाल उठाया है कि जब पहले से ही बच्चे की धड़कन धीमी होने की जानकारी थी, तो समय रहते ऑक्सीजन की व्यवस्था कर एम्बुलेंस से रेफर क्यों नहीं किया गया।

मेडिकल ऑफिसर का पक्ष-
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालपुर के मेडिकल ऑफिसर से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि भर्ती के समय ही बच्चे की हार्टबीट धीमी थी। उनके अनुसार, परिजनों से अन्य अस्पताल ले जाने के लिए सलाह दी गई थी, लेकिन अटेंडर के कहने पर यहीं डिलीवरी कराई गई और सहमति पत्र (कंसेंट फॉर्म) भी भरवाया गया। उन्होंने कहा कि बाद में बच्चे की स्थिति को देखते हुए रेफर किया गया। ऑक्सीजन के साथ रेफर नहीं करने के सवाल पर उनका कहना था कि रेफर के बाद मरीज को किस प्रकार ले जाया जाएगा, यह अटेंडर की जिम्मेदारी होती है।

पीड़ित परिवार का आरोप-
वहीं पीड़ित परिवार का कहना है कि जब जांच में बच्चे की धड़कन धीमी बताई गई थी, तब वे तुरंत अन्य अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें कुछ समय प्रतीक्षा करने को कहा गया। उनका आरोप है कि प्रसव के बाद बच्चे की हालत गंभीर थी, फिर भी बिना ऑक्सीजन और बिना एम्बुलेंस के रेफर कर दिया गया। जांजगीर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने कथित तौर पर बताया कि ऑक्सीजन के साथ लाया जाता तो बच्चे की जान बच सकती थी और ऑक्सीजन व एम्बुलेंस की व्यवस्था अस्पताल की जिम्मेदारी होती है।

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